Leucorrhea (सफ़ेद-पानी) लिकोरिया एक स्त्री रोग है जिसे आम भाषा में सफ़ेद-पानी या वाइट डिस्चार्ज white discharge कहा जाता है। योनि में एक सेल्फ-क्लिन्ज़िंग प्रक्रिया होती है जो किसी भी बाहरी कण को हल्के बहाव से उसे निकाल कर फेंक देता है। यह कोई चिंता का विषय नहीं है क्यूंकि यह पूरी तरह से सामान्य है और एक स्वस्थ योनि की निशानी है। सामान्य रूप से योनी से हमेशा mucous discharge होता है जो की सर्विकल, एंडोमिट्रियल ग्लैंड तथा अच्छे बैक्टीरिया के कारण होता है। सामान्य स्राव में योनी से निकलने वाला पदार्थ सफ़ेद या पानी जैसा होता है। इसमें कोई बदबू नहीं होती। यह केवल ovulation, pregnancy या sexual arousal के दौरान ही ज्यादा मात्रा में निकलता है। बाकी समय यह काफी कम मात्रा में निकलता है। योनी से होने वाला सामान्य स्राव, जनन अंगों की सफाई और lubrication करता है। यह स्राव योनी को इन्फेक्शन से भी बचाता है। लिकोरिया में होने वाला स्राव अलग होता है। लेकिन अगर कोई संक्रमण है, तो निर्वहन रंग बदलता है। कई महिलाओं को योनि स्राव, दर्द या योनी में जलन की समस्या होती है। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब यह सफेद, चिपचिपा और गंधहीन होता है। कारण- 1. बैक्टीरियल संक्रमण या फंगल संक्रमण 2. मधुमेह और एनीमिया 3. योनि में डाले गए गर्भ निरोधकों की वजह से जलन 4. यौन क्रिया 5. तनाव और आघात 6. अनियमित मासिक धर्म 7. सुगंधित उत्पाद जैसे साबुन, पैड, टैम्पोन या शराब और धूम्रपान 8. डायबिटीज से ग्रस्त महिला के वेजाइना में फंगल यीस्ट होना 9. कॉपर-टी लगे होने पर 10. बार-बार एबॉर्शन होना या कराना लक्षण- 1. पीला, हरा या ग्रे, सफेद, दही जैसा डिस्चार्ज 2. योनि और प्रजनन पथ में खुजली या जलन 3. दैनिक आधार पर कमजोरी और सुस्ती 4. संभोग के दौरान दर्द 5. गंध में बदलाव 6. पानी और शुष्क ऊतक के नुकसान के कारण कब्ज 7. पीठ में दर्द बचाव- गुप्तांगों को साफ़ रखें। अच्छी हाईजीन रखें। बहुत खुशबुदार, तेज़ साबुनों का प्रयोग न करें। Cotton की पैंटी पहने और रात को सोने से पहले ज़रूर बदल लें। योनी क्षेत्र को गीला न रहने दें यह बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है। Exercises करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पियें। पीरियड्स में अच्छे पैड का प्रयोग करें। गंदे कपड़े/पैड का प्रयोग रोग पैदा करता है। हर 4-6 घण्टे में पैड बदलते रहें। इसमें खान- पान का विशेष ध्यान रखें। अधिक नमक एवं मसालेदार भोजन का सेवन न करें। जंक फूड एवं बासी भोजन बिल्कुल न खाएं। फल एवं रेशेदार सब्जियों को अधिक से अधिक अपने आहार में शामिल करें। पौष्टिक भोजन लें। उपचार - हमारी होम्यो में इसका बेहतर इलाज़ संभव है। कुछ दवा बताने जा रही हूं। जैसे कि - Kali bi, Kreosote, Hydrastis, Pulsa, Lil tig, Sulph, Calc carb, Graph etc etc. कुछ भी दवा लेने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। Dr. Promila Nehra

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Informative post

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उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण जानकारी हेतु धन्यवाद देता हूं।

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Jankare purna

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Very Nice, Useful Update Thanks Dr Promila ji

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